आज के आधुनिक युग मे जहाँ हमने दवाईयों से कई बीमारीयों पर फतह पायी है, वही इनके साईड-इफ़ेक्ट के कारण कई नयी बीमारीयों से ग्रस्त भी हुए हैं, हमारा यह प्रयास होगा कि आप तक ऐसे अचूक तरीके ले आयें ताकि आप बिना किसी अतिरिक्त हानि के स्वास्थ्य लाभ कर सकें।
March 29, 2011
क्या आप इस आग का हिस्सा नहीं बनना चाह्ते?
कम से कम इक चिंगारी लगानी पडती है
ख्वाब देखने से क्या होता है भला?
सच ये है कि नींद उडानी पड़ती है
क्या नही है इसका अफसोस करके क्या फायदा
जो है उसकी तिश्नगी बढानी पडती है
तकदीर ओ तदबीर की जंग मिटती नहीं
अपनी कहानी खूद बनानी पड़ती है
दर्द है इस जहां मे बहूत गरिमा
खुशियाँ तो खूद से ही लानी पड़ती है
हाँ जानती हूँ मेरी यह कविता कोई मास्टर पीस नही है... पर जो मास्टर पीस है उससे रूबरू होने के बाद मुझे अपनी लिखी ये कविता याद आ गयी।
आप ये मत सोचियेगा की जीवनऊर्जा पर कवितायें होने लगी है, जीवनऊर्जा आज भी अपने नियम पर खरा उतर रहा है। आज की बीमारी अत्यंत सघन है, भ्रष्टाचार। हाँ अकेले जीवन ऊर्जा के पास इसका ईलाज नही है लेकिन अगर हम सब मिल जाये तो जरूर संभव है।
कुछ दिनो पहले ही sms के जरिये IAC के बारे मे जानकारी मिली... वेबसाईट पर गयी तो जो जानकारी पढ़ने के बाद मिली फिर अपने आपको रोक पाना असंभव सा लगा, तुरंत ही वोट बैंक के लिये और IAC के अन्य कार्यकलापों के लिये रजिस्ट्रेशन किया। और पता किया कि जयपुर मे क्या गतिविधी हो रही है।
अब जो वक्त आया है कि हम अपने अधिकार के लिये लड़ सके... कोई कृष्ण बनकर रास्ता दिखा रहा है तो मै कैसे धृतराष्ट्र बनी रह सकती थी भला।
अर्जुन ना सही... पर एक अदना सी सिपाही की तरह आगे आने कि हिम्मत तो होनी ही चाहिये। वरना तो सिर्फ यही कहना पड़ेगा कि "हमारे देश का कुछ नही हो सकता।"
मुझे इस वाक्य से गुरेज है कारण कि ये देश अगर भ्राष्टाचारियों का है तो मेरा भी है... फिर वो इस पर आधिपत्य जमा कर कैसे बैठ सकते हैं? और मै चुप ही रहूँ।
हमारे सिपाही इसलिये सीमा पर अपनी जान नहीं देते ताकि हम अन्दर के आतंकवाद मे मारे जायें। अगर वो सीमा पर अपना काम बखूबी निभा रहें हैं तो मै भी किसी सैनिक से कम नहीं, कम से कम अपने कार्य क्षेत्र मे तो मै भ्रष्टाचार के खिलाफ पहल कर सकती हूँ।
बचपन मे पढ़ा था... भगत सिंह ये कहकर शहीद हो गये कि उनके बाद हर घर मे भगत सिंह पैदा होंगे। हाँ हुए तो थे, तभी तो अंग्रेजो को हमारा देश छोड़कर भागना पड़ा, आज एक बार फिर जरूरत है भगत सिंह को वापस आना होगा। कब तक कोई इंतजार करेगा कि भगत सिंह पैदा हों हमारे यहां? क्यों ना भगत सिंह का वो जज्बा अपने अन्दर ही पैदा हो? किसी और का इन्तजार कब तक?
मेरी इस सोच का रास्ता मिल गया अन्ना और IAC के बारे मे जानकर। मै जानती हूँ कि मै तो इस देश की एक छोटी सी कड़ी हूँ, आप मे से कई लोग मुझसे कहीं ज्यादा कुछ करना चाहते होंगे। फिर किस बात की देर है?
आगे आयें, और जुड़ जायें इस महा अभियान में.... अपने लिये, अपने देश के लिये, अपने भविष्य के लिए...
अन्ना और IAC के बारे मे और जानकारी के लिये निम्न कडियो पर जरूर जायें।
www.indiaagainstcorruption.org
http://www.facebook.com/IndiACor
http://twitter.com/janlokpal
Just give a miss call to toll free number 02261550789 for your support to Anna Hazare
इस आग का हिस्सा जरूर बनें और दूसरो को भी बनायें।
विनम्र अनुरोध- हम चिट्ठाकार आज के समय एक प्रबल और सशक्त भुमिका निभा रहें हैं अपनी भावनाओं को जनता तक उजागर कर उनमे नया जोश भरने में। फिर यह जोश अपने देश के लिये है इसको भी बाँटे, मेरा आप सबसे विनम्र अनुरोध है कि अपने अपने चिट्ठा पर इस आंदोलन का जिक्र जरूर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे जान पायें।
April 01, 2010
बहुत दुख हुआ !!!!!!!!!!!!!!!!!
बहुत दुख हुआ , बहुत ही ज्यादा दुख हुआ, अपनी ही धरा पर अपनी ही धरा की बेईज्ज्ती और अपनी ही संस्कृति की खिल्ली उड़ते हुए मैने इस बलोग पर देखी है ???????
पहले तो ऎसे ब्लोग नही थे ? अब कहां से आ गये ? कुछ गिने चुने लोग अपने स्वं के धर्म को बड़ा बताते हुए भारतीय संस्कृति का मजाक उड़ा रहे है ।वह भारतीय संस्कृति जो अनेक धर्मो की जननी है , उस जननी की वो लोग खिल्ली उड़ा रहे है ? अचरज होता है मुझे !!!! और अपनी ही संस्कृति का मजाक देखेने के लिये हम स्वयं इस तरह के ब्लोग पर जाकर उनके होसले को और बड़ा रहे है ???
सचमुच आज मै बहुत ही दुखी हुँ ।
अपने ही देश मे बेगानो की तरह रहना पड़ रहा है !!!!
June 01, 2009
खुजली और समाधान
उसकी बात सुनकर मै भी मुस्कुरा्ये बिना नही रह सकी। हाँ सच मे यह तो अत्यंत खुशी की बात है चुन्नी... फिर खिलाओ मिठाई। धत्त दीदी रोज मुझे कड़वे एलोवेरा के गुदा का रस पीना पड़ता है और आप मिठाई खाओगी? चलो आपको एलोवेरा ही पिलाती हूँ। चुन्नी ने चुटकी ले ली। नही नही मुझे तो अभी मिठाई ही खानी है मै भी भोर सलोने एलोवेरा पीती हूँ दिन मे तो मिठाई ही चाहिये... और हमारी बात कुछ देर चलती रही
चुन्नी की तो अलग बात है... पर चुन्नी की तरह कई बच्चे,बड़े भी गर्मी के दिनो मे अपनी सेन्सटिव स्किन के कारण किसी न किसी प्रकार की खुजली से परेशान रहते हैं। जितनी साधारण परेशानी यह लगती उतनी है नही, जो इसका भुक्तभोगी है वो तो यही कहता है "हे भगवान यह गर्मी क्यों आती है" अगर आप या आपके अपनो मे से कोई इसका भुक्तभोगी है तो आप इस दर्द को समझ सकते हैं।
पर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नही है, मै बताती हूँ कुछ सामान्य उपाय जिससे आप इस परेशानी से बच सकते हैं।
१. सबसे पहला काम, एकदम सौम्य साबुन का ही इस्तेमाल करें, बेहतर है की आप बेबी सोप का इस्तेमाल करें।
२. हल्के गुनगुने पानी मे थोड़ा सा नमक डालकर उससे दिन मे दो बार रोगग्रस्त हिस्से की सफाई करें। उसके बाद एलो वेरा के गुदा मैश करके उसमे ग्लिसरीन मिलाके फिर त्वचा पर लगायें आधे घन्टे बाद हल्के गुनगुने पानी से साफ कर लें।
३. त्वचा को रूखा ना होने दें, जैतुन का तेल लगायें (मेरी पसन्द) अथवा कैलेन्डुला क्रीम ग्लिसरीन की साथ मिलाकर लगायें।
४. खाने पीने का ध्यान रखें, मिर्च मसालो से परहेज और सादा भोजन, यूँ तो गर्मी मे सादा भोजन ही सभी के लिये अच्छा होता है।
५. मौसमी फल जैसे की खीरा, ककड़ी, तरबुज, खरबुज इत्यादि का सेवन जितना हो सके उतना करें।
६. कच्चे नमक का सेवन कम से कम करें।
७. किशमिश, छुआरे का सेवन करें।
८. रोज सुबह एक चम्मच एलोवेरा के गुदा को निकालें और उसे गरम पानी मे घोलकर छान लें फिर इसे पी जायें, खाले पेट। यह जरूर करें।
९. कब्ज हो तो उसका भी उपाय करें।
सामान्य तरह की गर्मी के दिनो मे होने वाली एलर्जी, खुज़ली, दाद के लिये यह था सामान्य उपाय इन्हे अपनायें, आपको अच्छा लगेगा।
अब गंभीर मसला हो तो
८. मेडिटेशन पर स्कीन एलर्जी सीख लें और उसे नियमित करें
९. औरा चेक-अप करायें, और हील करवायें
१०. अपने औरा के मुताबिक कृस्टल पहनें।
११. एक्युप्रेशर या सुजोक और सीड थेरेपी को अपनायें।
इतना सब करिये जरूर फायदा होगा... फिर आप भी मेरी तरह गर्मी का स्वागत करेंगे मीठे मीठे आम और मौसमी फलो के बहार को चखने के लिये।
May 05, 2009
मेदोदोष(Obesity)मे योगत्रयम ।
योग न० २---त्रिफ़ला का काडा बनाकर शहद मिलाकर पीने से सभी प्रकार के मेदोदोष नष्ट होते है ।
योग न० ३---पानी को गरम करके ठन्डा होने पर शहद मिलाकर पीने से भी सभी प्रकार के मेदोविकार नष्ट होते है ।
विशेष-- शहद काढे का चतुर्थांश लेना चाहिये, २० ग्राम औषधि को ३२० ग्रा. पानी मे जब तक धीमी आँच पर गरम कर जब तक की वो आधा नही रह जाता । प्रात: काल काढे का सेवन करें। (शा. सं,म,ख,२)
May 02, 2009
दाद पर विचित्र चुटकला , yeast infection, fungal infection of skin
यदि आपको कोई पुराना दाद या उस जैसा कोई इन्फ़ेक्सन है तो आप निम्न बातों का ध्यान रखें----
१) सामान्य नहाने वाली साबुन, शैम्पु, आदि केमिकल का प्रयोग बन्द कर दे ! नहाने के लिये केवल गिलिसिरिन सोप का प्रयोग कर सकते है
२)यदि आप कोई एटी फ़ंगल क्रीम लगा रहे है तो आप उसे लगातार लगाएं, ऐसा मत करे कि १-२ दिन लगाई और कुछ ठीक होने पर फ़िर छोड दी ! इससे दाद और भी जिद्दि हो जाता है
३) नहाने के बाद नारियल का तैल लगाएं।
४) पहनने वाले कपडे अच्छी तरह धुले हुए और सुखे हुए होने चाहिये , मेरा कहने का अभिप्राय यह है कि उनमे डिटर्जण्ट का मामुली सा अंश भी नही रहना चाहिये।
ये मामुली सी बाते आपको विभिन्न त्वक विकारों से बचा सकती है ।
अब जिद्दि दाद के लिये कुछ आयुर्वेदिक योग--
पकने वाले दाद के लिये- त्रिफ़ला को तवे पर एक जला ले ( त्रिफ़ला को तवे पर रख कर उस पर कटोरी उलटी कर के रख दे ताकि धुवां त्रिफ़ला की भस्म मे ही रम जाए) फ़िर उसमे कुछ फ़िटकरी मिला कर और वनस्पतिक घी, कुछ देसी घी, सरसो का तैल, और कुछ पानी , सबकी समान मात्रा होनी चाहिये , इन सब को मिलाकर इनको खरल मे अच्छी तरह मर्दन करे , और मलहम बना ले । बस आपकी क्रीम तैयार , पकने वाले और स्राव युक्त दादों पर इसे लगाए ।
जिद्दि और रुखे दाद के लिये------
पलाश के बीज, मुर्दाशंख, सफ़ेदा, कबीला, मैनशिल, और माजु फ़ल इनका चुर्ण समान मात्रा मे, करन्ज के पत्तों का रस, निम्बु क रस, इनसे भावना देकर सारा दिन मर्दन करें । बस औषधि तैयार है । इन सब की गोली बनाकर सुखा ले और गुलाब जल के साथ घीस कर प्रभावित स्थान पर लगाले ।
April 29, 2009
कमर दर्द , कटि शूल
रजनीश जी सबसे पहले तो आप वात प्रपोकप आहर विहार जैसे कि चावल लस्सी ठन्डे पेय पेय पदार्थ अर्जीर्ण मे भोजन करना, बार बार खाना, सामने कि हवा का सेवन, लगातार एक हि सिथिति मे बैठे रहना, देर रात तक जागरण करना, ठन्डे पानी से स्नान करना ,झुककर कार्य करना , आदि से परहेज रखें।
आयुर्वेदिक औषधियों मे निम्नलिखित योग को करें---
वृहद वात चिन्तामणि रस -१२५ मि. ग्रा.
योगराज गुग्गुलु- ४०० मि. ग्रा.
अश्वगन्धा चुर्ण- आधा चमच ।
सुबह शाम दुध के साथ या कोष्ण जल के साथ ।
रात को एरण्ड तैल दुध मे डालकर पीना ( मात्रा १ चमच से बडाकर आवश्यकता अनुसार इतनी बढा ले जिससे सुबह हल्का सा दस्त लगे)
२१ दिनो तक इस योग को ले ।
आहार मे -- खसखस का हलुवा बनाकर दिन मे एक बार अवश्य ग्रहण करें।
विहार मे- ऐसे व्ययाम करे जिससे कमर के मेरु द्ण्ढ का प्रसारण हो , ।
April 28, 2009
पुरुषत्व वृदि के लिये
अमिष भोजोनो मे ताजा मांस, पक्षियों के अण्डों का सेवन, वन्य चटक पक्षि का मांस, मगर के अण्डे या मांस का सेवन वीर्य वर्धक होता है ।
आयुर्वेदिक औषोधियों मे , अश्वगन्धा लेह, शतावरी घृत, कामदेव चुर्ण, धातु पौष्टिक चुर्ण, क्रोंच पाक , मुसली पाक, आदि बहुत ही उपयोगी होते है । जिनकॊ प्राय: अवसाद की स्थिति बनी रहती है उनके लिये इन आहार और औषधियों का सेवन बहुत ही हितकर होताहै ।
देसी गाय का दुध सदा ही हितकर होता है और मानसिक रोगों को जड से खत्म करता है
April 21, 2009
कुमारी , ग्वारपाठा, घृतकुमारी (Alove vera)
आधुनिक औषधि वर्गीकरण मे इसे पित्तविरेचन वर्ग मे रक्खा गया है । इसकी मुख्य क्रिया वृहदाआन्त्र पर होती है जिससे इसकी पेशीयों का प्रबल संकोच होकर इसकी पेरीस्टालिक मुमैंट बढ जाती है । इस तरह से यह कब्ज मे मुख्य रुप से काम करता है ।
कुल मिलाकर यह अपान वायु पर कार्य करता है
आचार्य भावमिश्र ने इसके ये गुण , दोषकर्म बताएं है ----भेदनी -- यानि रुके हुए मल का भेदन करने वाली
२ शीत
३. तिक्त
४ नेत्रॊं के लिये हितकर
५. रसायन ( बुढापे को रोकने वाली और व्याधिक्षम्त्व बढाने वाली)
६बृंहणीय ( शरीर को मोटा करने वाली)
वृष्य, बल्य, वातशामक, विषनाशक, गुल्म ( बाय का गोला), प्लीहारोग, यकृत विकार, कफ़रोग नाशक, ज्वरहर, ग्रन्थि नाशक( टुमर, सीस्ट,) नाशक, जले हुए मे लाभकारी, त्वचा के लिये हितकर,पैतिक और रक्त्ज रोगों का नाशक।
इसका घन यानि एलुआ मुख्य रुप से आर्तवजनन होता है ।
अब सवाल आता है कि इसका प्रयोग कैसे करे या किस रुप मे करे? आपके पास दो विक्ल्प है , एक एलोव वेरा जूस और अन्य आयुर्वेदिक शास्त्रिय योग जैसे कि कुमार्यासव । आईए इनका तुलनात्मक अध्ययन करके देखेते है ।
एलोव वेरा जूस मे सिर्फ़ एक घटक यानि ग्वारपाठा होता है , जिसमे कम्पनिया इसको सुरक्षित रखने के लिये विभिन्न प्रकार के प्रिजर्वेटिव केमिकल डालती है जैसे की - सिट्रीक एसिड , सोडियम बेन्जोएट, आदि आदि,।
अब ऋषिमुनियों द्वारा वर्णित योग यानि कुमार्यासव का अध्ययन करते है ---
मुख्य द्रव्य- ग्वारपाठे का रस
२ शहद, ३, लोह्भस्म,४,पुरानागुड,
मुख्य प्रेक्षप द्रव्य---
हल्दी, अकरकरा, त्रिफ़ला, त्रिकटु, नागकेशर, पिप्प्लीमूल, मुलेठी, पुष्करमूल, गोखरु,केवांच के बीज, उटंगन के बीज, पुनर्नवा, लोंग, इलायची, देवदारु आदि( शा० सं०)
कल्पना-- सन्धान कल्पना ( कुदरती एल्कोहाल )
जैसा कि पहले बताया है मुख्य रुप से ग्वारपाठा कफ़पित्त शामक होताहै यानि यदि लगातार इस को अकेले हि प्रयोग करते है तो यह शरीर मे दोषों को असाम्य कर सकता है । एलोव वेरा जुस मे केमिकल भी होते है यह भी सोचीये ..........?
लेकिन कुमार्यासव मे कोई केमिकल नही होता और न ही सिर्फ़ एक ही द्रव्य , ग्वार पाठे के विपरित प्रभाव को दुर करने के लिये इसमे अन्य द्रव्य बहुत है ।
अत: मेरे विचार मे एलोव वेरा जुस की आपेक्षा कुमार्यासव लेना हितकर है ।
April 16, 2009
दाढी मे सफ़ेद बाल !
I M 27 YEARS OLD BOY. MERE DADHI K BAL SAFED HO RAHE HAIN , SARIR K KAI HISSON K EK-DO BAL SAFED HO GAE HAIN, PLZ KOI PRABHAVSALI ELAJ BATAIEN. MAI AAPKA ABHARI RAHUNGA.
ROHIT GUPTA
रोहित जी, अभी से आपके दाढी के बाल सफ़ेद होने लगे ! यह तो चिन्ता का विषय है। सबसे पहले तो आप शेविन्ग क्रीम से शेव करना बन्द कर दीजीये इसकी जगह आप गाय के दुध से शेविन्ग करे , लगता है आप की पैतिक प्रकृति है अत: आप आँवला का प्रयोग करे १ चमच दो बार सुबह शाम ताजे पानी के साथ और भृंगराजासव १५ मि. लि. + १५ मि. लि. पानी , सुबह शाम खाना खाने के बाद दो बार । षड बिन्दु का नस्य दो दो बुन्दे दिन मे कम से कम एक बार ।
हर प्रकार के शैम्पु और केमिकल का प्रयोग बन्द कर दे । स्थानिक प्रयोग के लिये पन्चतिक्त घृत और भृंगराज तैल दोनो को मिलाकर प्रयोग करे । लगातार प्रयोग करे और रिज्लट देखे अपनी आँखों से !!
April 13, 2009
कद लम्बा करें !
It is pleasure to write you again. This time i want to know that if it is possible in ayurveda to increase height of a 22 yrs girl. Her height is 4.11 ft at present . Please publish treatment in the blog for get increment in height if possible.
Best regards,
anil.
एक बार फ़िर हमे याद करने के लिये अनिल जी आपका धन्यवाद। वैसे कुदरत ने जो कुछ हमे दिया है उसमे हमे खुश रहना चाहिए। शरीर का कद मुख्य रुप से अनुवान्शिक गुणों पर आधारित रहता है।
फ़िर भी यदि कोई अपने छोटे कद से चिन्तित रहता है तो यह योग करके देखें बेहतर यही होगा कि इन आयुर्वेदिक औषधियों को आप शीत काल मे ले क्योकि शीत काल मे धातु अग्नि और जठरा अग्नि दोनो ही प्रबल रहती है।
अश्वगन्धा चुर्ण १ ग्रा.
हालिम चुर्ण( चन्द्रशुर) १ ग्रा.
धागा मिश्रि १ ग्रा.
इन सभी को मिलाकर सुबह शाम दुध के साथ ले
औषधियों को लेते वक्त आप शरीर का प्रसारण करने वाले व्ययाम जैसे की साईकलिंग,रस्सा कुदना, लटकना ,आदि साथ मे करे ।
April 03, 2009
उदर रोग
सुदेश कॊशिक
बाजुरु और तली हुइ चिजों का परहेज रखें। मै कुछ आयुर्वेदिक औषधियां लिख रहा हुँ , उनको आप सुदेश जी , सबसे पहले तो आप अपनी दिनचर्या को नियमित किजिये समय पर सादा खाने ले और लगातार २ महीनो तक लिजिये और मासिक के दिनों मे मत लिजियेगा
कुमारयासव २० मि. लि. + २० मि. लि. पानी मिलाकर दो समय खाना खाने के बाद ( कुमारयासव जितना पुराना मिले उतना ही ठीक है)
अविपत्तिकर चुर्ण २ ग्रा. या एक चमच खाना खाने से पहले दो बार
आयुर्वेद मे निष्ठा रख कर ये औषधिया लिजिये और कुछ ही दिनों मे आप सवस्थ महसुस करोगी
March 26, 2009
oligospermia ( अल्प शुक्राणु )
I am suffering from oligospermia and wants to make father but less sperm causes i cant make father.
can I growth in my sperm count.
regards
surendra
आज कल फ़ास्ट लाईफ़ और फ़ास्ट फ़ुड से इस प्रकार की समस्याएँ दिन प्रतिदिन बड रही है । सुरेन्द्र जी सबसे पहले तो आप अपनी दिनचर्या कॊ नियमित किजिये और व्ययाम जरुर करिये । सादा खाना खाएँ और धुम्रपान और मदिरा पान यदि आप करते है तो फ़ोरन बन्द कर दें।
यहाँ मै कुछ आयुर्वेदिक औषधियाँ लिख रहा हुँ इनको लगातार तीन महीनो तक सेवन करे और पथ्य पालन करे ।
क्रोन्च बीज चुर्ण १ ग्रा.
गोखरु चुर्ण १ ग्रा.
मुसली चुर्ण १ ग्रा.
सुबह शाम एक एक चमच दुध के साथ
रस सिन्दुर १२५ मि. ग्रा.
वंग भस्म २५० मि. ग्रा.
शुद्ध शिलाजीत २५० मि. ग्रा.
पुष्पध्न्वा रस १२५ मि.ग्रा.
ये सभी शहद मे मिलाकर सुबह शाम दुध के साथ
कुमार्यासव ( जितना पुराना मिल सके उतना ही अच्छा) २५ मि. लि. और सममात्रा जल मिलाकर खाना खाने के बाद दो बार
आयुर्वेद मे निष्ठा रखकर लगातार तीन महीनो तक इन औषधियों का सेवन करे आप अवश्य ही ठीक हो जाओगे
February 14, 2009
वात रोग, पक्षाघात
कोहली जी , पक्षाघात का वर्णन मैने अपने पिछले लेख मे कर दिया है ,
उम्र जितनी बडती है , शरीर मे वात दोष भी उतना ही बडता है , क्योकि बिमारी दो सालो से चल रही है और उम्र भी ८० साल है इस लिये बेहतर यही होगा की आप किसी पंचकर्म आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेकर चिकित्सा शुरु करे
वात रोगो के सभी उपक्रम प्रयोग करके और दोषों की अवस्था का विनिश्चय करके पंचकर्म द्वारा इस रोग से मुक्ति मिल सकती है
February 11, 2009
२००१ से हेपैटाईटीस से पिडित हूँ
I m manish 27 yrs old. I m suffering from Hepatites B from 2001. Is there are any treatment in Ayurveda about this diesease ??? Plz tell if there are any chances for any treatment because i m single yet and wanna married soon.
Best regds,
manish.
.आयुर्वेद मे यकॄत रोगों का इलाज संभव है । सबसे पहले तो आप आम पाचन के लिये सुदर्शन चुर्ण २ ग्रा. और अर्क मको २५ मि. लि. सबह खाली पेट १ सप्ताह के लिये सेवन करें।
उसके बाद पंचतिक्त घृत ५० मि. ग्रा. से शुरु करके ५० मि. ग्रा. हर रोज बडाते हुए तीन दिनो तक सुर्यदोय होने के समय सेवन करे और केवल मुंग की दाल वाली खिचडी का सेवन करे , प्यास लगने पर कोष्ण जल का सेवन करें।
हल्के जुलाब लगाने के लिये आप निशोथ ४ ग्रा. और १० ग्रा. मिश्रि मिलाकर सेवन करें , इससे आपको हल्के दस्त लगेंगे घबराना मत।
आरोग्य वर्धनी वटी ४०० मि ग्रा.
लोक नाथ रस २५० मि. ग्रा.
धात्री लौह २५० मि. ग्रा.
यह एक मात्रा है , इसको आप सुबह शाम शहद मे मिलाकर सुबह शाम खाली पेट ले।
भुमि आँवला १२ ग्रा. रात को आधे गिलास गर्म पानी मे भिगोकर सुबह खाली पेट ले
यह आप लगातार २१ दिनो तक करें।
गरिष्ठ भोजन, अधिक तैलीय पदार्थ , और मिर्च का सेवन मत करें
January 13, 2009
जीवनऊर्जा आया अमर उजाला मे
January 12, 2009
Hight BP and albuminuria (प्रमेह)
sabhi Jaanch aur abhi tak ke ilaaj ka pura byora mail se dena sambhav nahin hai. kripaya margdarshan den ki hum kis tarah se aapse uchit paramarsh lekar laabh le sakte hain.
dhanywad.
--
Sarvesh Tiwari
आपकी पत्त्नी रक्त्ज और पित्त्ज दोष की अधिकता से पिडित है , आप निश्चिन्त होकर ये योग अपनी पत्त्नी को दें--
गोक्षुरादि गुगुलु ३०० मि. ग्रा.
वासा चुर्ण २ ग्रा.
निम्ब चुर्ण १ ग्रा.
आँवला चुर्ण १ ग्रा.
हल्दी चुर्ण १ ग्रा.
सुबह शाम ताजे पानी के साथ ले
खाना खाने के बाद देवदार्व्यारिष्ट २५ मि. लि. और समान मत्रा मे पानी मिलाकर खाना खाने के बाद दो बार।
खाने मे सांटी चावल का अधिकता से प्रयोग करे और दाल का परहेज रखे।
December 31, 2008
श्वित्र कुष्ठ (Vitiligo)
आपने बहुत ही कम जानकारी दी है , इस जिद्दी रोग से बहुत हि रोगी पिडित है अत: मै इसकी सामान्य चिकित्सा लिख रहा हुँ । ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह रोग जितना पुराना होता है उतना ही जिद्दी होता है
सबसे पहले तो खट्टी चिजों का और नमक का बिल्कुल परहेज रखे. जब तक दवाइ चलती है
सादा खाना खाएं, मांस , मछली , अण्डा, शराब आदि का परहेज रखें।
हर रविवार सुर्य देवता की उपसना करे और व्रत रखें।
शशिलेखा वटी २५० मि. ग्रा.
उदयादित्य रस १२५ मि. ग्रा.
बाकुची तैल २ बुन्दे
शहद अधा चमच
यह एक मात्रा है सुबह शाम ले।
खदिर क्वाथ १ लिटर मे बाकुची चुर्ण १०० ग्रा. मिलाकर उसको इतना पाक करे कि वह अवलेह जैसा हो जाए , इसकी १ चमच इन औषधियों के साथ ले सुबह शाम।
लगाने के लिये--
तुत्थ आश्च्योतन _ प्रभावित स्थान पर लगाएं और आधा घन्टा के लिये सुबह के समय धुप सेके
कुछ दिनो बाद प्रभावित स्थान पर फ़फ़ोले पडेंगे उन पर चित्रक और गुन्जा फ़ल चुर्ण को गोमुत्र मे पीसकर लेप करें।
तीन महीनो लगातार करे और पथ्य पालन करे ।
December 30, 2008
पक्षाघात
MY SON AGED 21 YEARS - A CASE OF CEREBRAL PALSY SPASTIC QUDERIGIPLEGIA.PERSENTLY PERSUING M.Sc. BIOTECHNOLOGY LOCALLY FROM ALWAR (RAJ).HE IS SLOW IN WRITING DUE TO SPASTICITY.IN WALKING DRAG TOES OF BOTH LEGS. LANDING ON TOES.SEEKS SUPPORT WHILE WALKING.
KINDLY ADVISE
-S P PARASHAR
परशार जी , तकीनिकी कारणो से मै आप द्वारा दी गई रिपोर्ट्स को प्राप्त नही कर सका । आपने रोग के आरम्भ होने का समय नही बतया है ।
इस तरह के लक्षणो को आयुर्वेद मे वात रोगो की श्रेणी मे रखा गया है ।
पन्चकर्म आयुर्वेद इसमे बहुत ही उपयोगी है । बेहतर यही होगा कि आप किसी पन्च्कर्म चिकित्सक से सपर्क करे।
फ़िर भी सामान्य चिकित्सा मै यहाँ लिख रहा हुँ -
हर रोज एरण्ड तैल २० मि. लि. दुध मे डालकर रात को , इससे सुबह एक हल्का सा दस्त लगेगा।
बला तैल और महानरायण तैल दोनो मिलाकर प्रभावित अँग और शिर कि मालिश।
क्षीर बला तैल का नस्य।
मालिश करने के बाद सेक- कुकर मे एरण्ड पत्र और निर्गुन्डी पत्र लेकर सीटी उतार कर नली लगाकर प्रभावित अँग को सेके।
निरुह बस्ति- ३० मि. लि. क्षीरबला तैल सिरिंज मे लेकर एनिमा करे और उसके बाद ७०० मि. लि. दशमुल का गुनगुना क्वाथ एनिमा पोट मे लेकर एनिमा कर दे । ध्यान रखे कि यह सब खाली पेट करना है , (सप्ताह मे एक बार)
मात्रा बस्ति-- निरुह बस्ति के बाद अगले दिन ४५ मि. लि. क्षीर बला तैल(कोष्ण) सिरिंज मे लेकर खाना खाने के तुरन्त बाद एनिमा करें, ध्यान यह रखे कि यह बस्ति खाने खाने के तुरन्त बाद ही देनी है , १ सैकण्ड का भी विलम्ब ना करे । (लगातार ७ दिन)
खाने के लिये--
बृहत वात चिन्तामणि रस १२५ मि. ग्रा.
श्रन्गाभ्र रस २५० मि. ग्रा.,
विष तिन्दुक वटी १२५ मि. ग्रा.
योगराज गुग्गुलु २५० मि. ग्रा.
यह एक मात्रा है शहद मे मिलाकर सुबह शाम खाना खाने से १ घन्टा पहले ।
अजमोदादि चुर्ण ३ ग्रा. खाना खाने के बाद दो बार कोष्ण जल से
अश्वगन्धारिष्ट और बलारिष्ट दोनो मिलाकर २० मि. ग्रा,. और समान मात्रा मे पानी मिलाकर खाना खाने के बाद दो बार
इसके अतिरिक्त नियमित व्ययाम भी करवाते रहे ।
१ महिने तक इस योग को करे इसके बाद मुझे मेल करके सुचित करे
December 29, 2008
दमा asthama
मै पिछले १५ साल से अस्थमा से परेशान हूँ। मुझे नियमित रूप से कब्ज रहता है। रोज रात को छींके आनी शुरू हो जाती हैं, जो सूबह ११ बजे तक रहती हैं। किसी तरह का व्ययाम नही कर पाती हूँ, तुरन्त ही साँस लेने मे तकलीफ शुरू हो जाती है, इस वजह से वजन भी बढ गया है। मै ३२ साल की घरेलु महिला हूँ, घर पर मेरी वजह से सभी परेशान रहते हैं। कुल मिलाकर अब यह तकलीफ बर्दाश्त के बाहर है। मार्गदर्शन करें।
दमा वाकई मे तकलीफदेह बीमारी है, पर आप चिन्ता ना करें, आपके इस तकलीफ का समाधान है।
१. सबसे पहले आप गरम पानी पीना शुरू करिये। जब भी लें, गरम पानी ही लें। (कभी कभार समान्य ताप की पानी ले सकती हैं)
२.सुबह नाश्ते मे गाजर, पपीते, को नाश्ते मे शामिल करें।
३.नाश्ते के बाद ११ दाने कालीमिर्च के दाने खा कर एक गिलास गरम पानी लें।
४.खाना आप एक साथ भर पेट न खाकर थोड़ी-थोड़ी बार बार खाईये।
५.कुछ दिनो तक गुड़, मिठाई, तली भूनी चीजो को भूल जाईये(हफ्ते मे एक बार थोड़ा सा ले सकती हैं)
६.अमरूद, केले जैसे ठण्डी तासिर के फलो का ना लें।
६.रात को सोने के २ घण्टे पहले खाना खा लें।
७.सोने के ठीक पहले एक गिलास दुध मे आधी चाय चम्मच हल्दी पाऊडर, और ११ दाने काली मिर्च डालकर एक उबाल आने दें। अब सामान्य ताप होने पर कालीमिर्च चबाचबाकर ऊपर से दूध पी जायें।
८.अस्थमा का दौरा पड़े तो अपने इन्हेलर्स का इस्तेमाल करे ही करे साथ मे एक ग्लास पानी मे १ चम्मच मेथी दाना डालकर पानी को आधा होने तक खौलाये, छान कर धीरे धीरे पीते रहें।
९.धीरे-धीरे आदत डालिये और सर्पासन, भुजंगासन, वज्रासन, फिर पाद पश्चिमोतासन, सर्वांगासन, सूर्य नमस्कार और रीढ़ की १२ विधियों वाले आसन करिये।
१०. शुरू मे सिर्फ गहरी साँस लेने का अभ्यास करे, फिर प्राणायम करें।
११. कुछ दिनो बाद धीमी गति से टहलने फिर जागिंग फिर थोड़ा तेज दौड़ लगाने का अभ्यास करें (आप याद रखिये कि यह सब एक दिन मे कतई ना करें) आराम से धीरे धीरे अभ्यास करें।
१२. power key meditation for asthma, का कोर्स कर लिजीये।
१३. अपने औरा रीडर को सम्पर्क करिये और उनसे नियमित रूप से हर १ महीने पर औरा बैलेंस करवाईये।
१४. चन्द्र पेन्डेंट को ऊर्जान्वित करके पहनिये।
एक महीने यह सारा प्रयोग करें, और फिर हमे बतायें। आप याद रखिये ईलाज जादु की छड़ी नही बल्कि आपके और चिकित्सक दोनो के धैर्य किये हूए मेहनत का परिणाम होता है।
(हम आपकी प्राईवेसी का सम्मान करते हैं, अतः आपके इच्छा के बिना आपका नाम, पता प्रकाशित नही किया जायेगा)
December 25, 2008
शिर: शुल
सिर का दर्द कई कारणॊ से होता है । सबसे पहले तो आप अपना रक्त चाप चैक करवा ले कई बार अत्यधिक रक्त चाप बडने से भि सिर मे दर्द हो जाता है ।
हर प्रकार के शिर:शुल मे आयुर्वेदिक पथ्यादि क्वाथ बहुत ही उपयोगी होता है
हरड , बेहडा, आँवला, चिरायता, आमा हल्दी, नीम की अन्तर छाल, और ताजी गिलोय प्रत्येक सम भाग लेकर यव कुट कर के रख ले ।
३० ग्रा. यह क्वाथ लेकर १६ गुणे पानी मे धीमी आँच पर पकाये, जब जल का अठावाँ हिस्सा बच जाये तो उसे उतार ले । क्वाथ को छान कर गुनगुना ही थोडा गुड डालकर पी जाए खाली पेट सुबह के समय
साथ मे ---
गोदन्ती भस्म २५० मि. ग्रा.
पिप्प्ली चुर्ण ५०० मि. ग्रा.
आक के फ़ुलों का चुर्ण ५०० मि. ग्रा.
ब्राह्मी वटी २५० मि. ग्रा.
यह एक मात्रा है , इन को कुट पीस कर अच्छी तरह मिलाकर - द्राक्षावलेह की एक चमच मे मिलाकर सुबह शाम दुध के साथ ले ।
लस्सी, दही, गरिष्ठ भोजन आदि का परहेज रखें। ४० दिनो तक ऐसा करने से आप का रोग ठीक हो जाएगा।
