आज ३० सितम्बर को जीवनऊर्जा के द्वारा १०००वें प्रश्न का समाधान दिया गया। वो भी तब जब जीवनऊर्जा पर नए पोस्ट नहीं डाले जा रहे हैं, मैं समझती हूं कि यह अपने आपमें जीवनऊर्जा के लिए बड़ी उपलब्धि है। जीवनऊर्जा यानि कि आप, मैं और वह हरेक व्यक्ति जो ऊर्जान्वित जीवन जीने की तमन्ना रखता है। आप सबको जीवनऊर्जा की तरफ से ढ़ेरो बधाई।

हम आपके प्रश्नों को पाकर एवम उनके समाधान की कोशिश कर अत्यंत प्रसन्न हो रहे हैं। आगे भी ये सिलसिला यूंही बना रहेगा। आप मुझे avgroup@gmail.com पर अपने सवाल यूंही भेजते रहें और जीवनऊर्जा से अपना स्नेह बनाएं रखें।

हमें यह बताते हुए भी हर्ष हो रहा है कि अब कुछ दिनो से हनी मनी नामक प्रत्रिका में भी जीवनऊर्जा के लेख नियमित रूप से हर महीने आने लगे हैं। उस पत्रिका के पाठको का स्नेह भी जीवनऊर्जा को वैसा ही मिल रहा है जैसा आपने दिया। ..... तहेदिल से शुक्रिया

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July 28, 2008

मानसिक अवसाद...टेंशन ..डिप्रेशन का कैसे हो उपाय

यह आज के आधुनिक युग का प्रसाद है हर व्यक्ति के लिए, कोई इस से बचना भी चाहे तो बच नही सकता है | आज के युग के साधन जहाँ आराम देते हैं ,वही इन साधनों को जुटाने की चाह देती है चिंता। टेंशन और चाह पूरी न हो या कुछ अधूरा सा जीवन लगने लगे तो डिप्रेशन हावी हो जाता है |

यह एक तरह का मानसिक रोग है | बहुत अधिक दुःख का अनुभव होना ,अकेलापन ,निराशा ,जीवन की दिनचर्या के साथ साथ न चल पाना अवसाद या डिप्रेशन को जन्म देता है |

कई बार मन अवसाद ग्रस्त होता है और अपने आप ठीक हो जाता है |लेकिन कई बार अवसाद मन में कहीं गहरे तक बैठ जाता है |इस के तब लक्षण दिखायी देते हैं ---

--दुःख का लगातार अनुभव

---लगातार उर्जा में कमी

--नींद में कठिनाई

--भूख में कमी

--वजन का घटना

---सिरदर्द का रहना लगातार

---अपच कब्ज रहना

---बात बात पर रोना और आत्महत्या की इच्छा होना |

इसके दुष्प्रभाव


-हृदय जन्य बीमारीयाँ

-अस्थमा का दौरा आना

-त्वचा की बीमारी होना

-शरीर मे खून की कमी हो जाना

-चश्मा लगना

-और भी जाने कई सारी बीमारीयाँ।


अब यह किसी एक वर्ग को हो यह जरुरी नही है। पढने वाले बच्चे परीक्षा के डर से , या नम्बर कम आने के डर से इस अवस्था में आ जाते हैं .महिलायें पुरूष कोई भी किस समय इस का शिकार हो जाए कौन जाने|

अवसाद रोगियों के लिए प्राकतिक चिकित्सा ,रेकी , ऊर्जा चिकित्सा आशा की किरण है |

प्राकृतिक चिकित्सा में दवाई के बिना रोगी को ठीक करने की कोशिश होती है
कई तरह के योगासन ,प्राणायाम ,संतुलित आहार पेट पर मिटटी की पट्टी ,रीढ़ स्नान ,आदि ऐसे कई उपाय है जिनसे पुनः सामन्य जीवन जीया जा सकता है | यह सभी उपाय किसी चिकित्सक की देख रेख में करने चाहिए |
अक्सर कई बार हम अवसाद ग्रस्त रोगी की बात को अनसुना कर देते हैं |वास्तव में ऐसा होना नही चाहिए , उसकी बात सुने उसकी मदद करे ताकि वह आत्महत्या जैसा विचार अपने दिल में पनपने न दे | उसको यह विश्वास दिलाये कि आप उसके साथ है वह अकेला नही है | खुली हवा अच्छा वातावरण ,उसमें उसका आत्मविश्वास वापिस ला सकता है |

यह तो थी प्राकतिक चिकित्सा ऊर्जा चिकित्सा से इसके उपचार के विषय में आपको डॉ गरिमा बतायेंगी ...



  1. आप अपने औरा हीलर को लाल और सुनहले रंग से औरा संतुलित करने के लिये कहिये।

  2. मेडिटेशन जरूर करें।

  3. अपने साथ ऊर्जान्वित गोल्डेन जिरकॉन रखें।

  4. समय समय पर आत्म विश्लेषण करते रहें।

हमने एक सेल्फ मेडिटेशन पैकेज बनाया है जो बहूत हद तक कारगर है, अगर किसी कारणवश यह काम नही करता फ़िर आपको रेगुलर मेडिटेशन कोर्स सीखन पड सकता है।


प्रथम चरण


आराम से बैठ या लेट जायें... ५ बार गहरी साँस ले, आँखे हल्की बन्द करें, और बस कुछ देर के लिये अपने दिमाग मे आने जाने वाले विचारो को देखते रहें। उनको पूरी तरह से महसूस करें। फ़िर ५ बार गहरी साँस ले उठ जाये। कुछ दिन तक यह प्रयोग करें।



दूसरा चरण


आराम से बैठ या लेट जायें... ५ बार गहरी साँस ले, आँखे हल्की बन्द करें, अब याद करे उन बूरे दिनो को, जिनके कारण आप परेशान हैं, जितना बूरा वक्त बीता है सबको... और सोचे कि ऐसा नही होता तो क्या होता? फ़िर ५ बार गहरी साँस ले और उठ जायें।


तीसरा चरण


आराम से बैठ या लेट जायें... ५ बार गहरी साँस ले, आँखे हल्की बन्द करें, अब अपने अच्छे दिनो को याद करें, हर इन्सान के जीवन मे अच्छे और बूरे दिन दोनो ही आते हैं, बूरे पर तो हम याद कर चूके हैं, अब अच्छे पलो की बारी है, जितना याद आये याद करें, कोई जल्दी नही है, आराम से धीरे धीरे आगे बढे और बढते जायें, फ़िर ५ बार गहरी साँस ले और उठ जायें।


अन्तिम चरण


अब तक आप समझ गये होंगे कि निराश होने वाली कोई बात नही है, जिन्दगी मे अभी आशा कि किरण बची है, तो अपने उस किरण को सोच का रूप दे डालिये।


आराम से बैठ या लेट जायें... ५ बार गहरी साँस ले, आँखे हल्की बन्द करें, अब अपने उस सोच को मन मे बार बार दूहराते जाईये.. जितना हो सके.. कोई जल्दी नही है.. आराम से... फ़िर ५ बार गहरी साँस ले और उठ जाईये। अब यही अन्तिम चरण आपको रोज करना है :)


मेडिटेशन का यह रेखाचित्र मात्र था.. आप अपने लिये सही शब्दो का चुनाव करे, या कोई परेशानी हो तो हमसे सम्पर्क करें।


अगर कोई इन्सान अत्यन्त अवसाद मे डूबा है तो बेहतर होगा कि उसको पहले ऊर्जा चिकित्सक से मिलवायें, उसके बाद मेडिटेशन करायें।



July 21, 2008

नींबू एक गुण अनेक

एक नींबू का रस रात को सोने से पहले या सो कर उठते ही एक गिलास ताजे पानी के साथ या गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से कब्जियत दूर होती है

रात में नींबू काट कर रख दे सुबह उसकी शिकंजी बना कर पी ले इसको पीने से आराम मिलेगा ।

नींबू के रस में पीसी हुई सौंफ लेने से कब्ज की शिकायत तो दूर होती ही है भूख भी खुल कर लगती है

नींबू के रस को काले नमक के साथ पानी में मिला कर लेने से रक्ताल्पता सम्बन्धी दोष दूर होते हैं और कब्ज दूर होने से रक्त शोधन की प्रकिर्या तीव्र गति से होती है॥

जायफल को नींबू के रस में घिस कर चाटने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस की समस्या भी नहीं रहती है ।

एक नींबू का रस गुनगुने पानी मे रोज लेते रहने से उच्च रक्तचाप मे लाभ होता है।
नियमित रूप से नींबू का प्रयोग करने से जुकाम होने की संभावना कम रहती है।

तैलीय त्वचा यदि हो तो नींबू रस मे बराबर मात्रा मे पानी मिलाकर चेहरा साफ़ करें |


फ़ैस पैक मे नींबू का रस मिलाकर प्रयोग करें ,दाग धब्बे जाते रहेंगे।

कोहनी पर नींबू के छिलके से सफ़ाई अच्छी होती है।

गुनगुने पानी मे नींबू का रस डालकर उससे एडियाँ साफ़ करे, सफ़ाई अच्छी होती है।

और भी उपाय हैं पर पहले यह आसान से उपाय कर के देखे ..जल्द ही फ़िर मिलेंगे आपसे ..कुछ नया लेकर क्यूंकि हमारा उद्देश्य है स्वस्थ जीवन उन्नत जीवन :)