तो वादे के अनुसार मै यह तरीका लेकर उपस्थित हुँ।
- अगर आप छोटे बच्चो के माता-पिता हैं और आपके फ़ैमिली ट्री मे मधुमेह है तो बच्चे के खाने को नियोजित करें, क्योंकि हो सकता है आप का लाड-प्यार या ये कहना कि अभी तो उम्र है इसके खाने की, आपके बच्चे को मधुमेह के शिकंजे मे फ़ंसा रही हो, आप ही समझिये कि भला ये कैसा प्यार है जो बच्चे को बीमारी का शिकार बनाये, भले रिजल्ट आज ना दिखे, पर दिखेगा तो।
- २० साल की उम्र के बाद आप नियमित रूप से मधुमेह टेस्ट कराते जाईये, ये तब और जरूरी हो जाता है-
- आपके घर मे किसी और को मधुमेह हो।
- आपके जन्म के समय आपके माता-पिता को मधुमेह हो।
- आप औसत से ज्यादा मीठा खाते हैं।
- आपका वजन ज्यादा है।
- आप तनावग्रस्त रहते हैं।
आपके चेक अप कराते रहने से अलार्मिंग घडी के पहले ही आप सावधान हो सकते हैं, और सही वक्त पर समाधान ले सकते हैं। इतना ही नही आप तनावमुक्त होकर खाने का आनंद भी उठा सकते हैं।
- जहाँ तक हो सके शक्कर के इस्तेमाल से बचे, शक्कर के इस्तेमाल से बचने का मतलब नही है कि आप मीठा नही खाये, बल्कि मीठा खाने का तरीका बदल दे, जैसे कि
- आजकल बाजार मे गुड से बनी मिठाईयाँ बहुत तादाद मे मिलती हैं, और शक्कर की अपेक्षा स्वादिष्ट भी होती हैं।
- कृत्रिम रासायनिक जुस पीने से अच्छा है कि आप घर पर निकाले ताजे फ़लो का जुस पीयें।
- खीर जैसे मीठे डिश मे शक्कर की जगह शहद का उपयोग करें।
- आईसक्रीम घर मे ही ताजे फ़लो का बनायें।
इस तरह की कितनी सारी और विधियाँ हैं जिनसे शक्कर का इस्तेमाल कम किया जा सकता है, क्योंकि प्रामाणिक तौर पर शक्कर यानि की चीनी, प्राकृतिक मिठास से ज्यादा खतरनाक होती है।
- कभी भी एक साथ बहुतायात से मीठा ना खायें, बल्कि जो भी खाना हो उसे थोडा-थोडा करके नियोजित ढंग से खायें।
बस इतनी सी बातो को का अगर सही वक्त से ध्यान रखा जाये तो मधुमेह से हमेशा के लिये दुर रहा जा सकता है।
देखने मे भले ये छोटी-छोटी बाते हैं, पर हैं बहुत काम की चीज, तो उम्मीद है कि आप आगे से अपना ध्यान रखेंगे और मधुमेह से दुर रहेंगे।
