आज ३० सितम्बर को जीवनऊर्जा के द्वारा १०००वें प्रश्न का समाधान दिया गया। वो भी तब जब जीवनऊर्जा पर नए पोस्ट नहीं डाले जा रहे हैं, मैं समझती हूं कि यह अपने आपमें जीवनऊर्जा के लिए बड़ी उपलब्धि है। जीवनऊर्जा यानि कि आप, मैं और वह हरेक व्यक्ति जो ऊर्जान्वित जीवन जीने की तमन्ना रखता है। आप सबको जीवनऊर्जा की तरफ से ढ़ेरो बधाई।

हम आपके प्रश्नों को पाकर एवम उनके समाधान की कोशिश कर अत्यंत प्रसन्न हो रहे हैं। आगे भी ये सिलसिला यूंही बना रहेगा। आप मुझे avgroup@gmail.com पर अपने सवाल यूंही भेजते रहें और जीवनऊर्जा से अपना स्नेह बनाएं रखें।

हमें यह बताते हुए भी हर्ष हो रहा है कि अब कुछ दिनो से हनी मनी नामक प्रत्रिका में भी जीवनऊर्जा के लेख नियमित रूप से हर महीने आने लगे हैं। उस पत्रिका के पाठको का स्नेह भी जीवनऊर्जा को वैसा ही मिल रहा है जैसा आपने दिया। ..... तहेदिल से शुक्रिया

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February 11, 2009

२००१ से हेपैटाईटीस से पिडित हूँ

Dear Sir,
I m manish 27 yrs old. I m suffering from Hepatites B from 2001. Is there are any treatment in Ayurveda about this diesease ??? Plz tell if there are any chances for any treatment because i m single yet and wanna married soon.
Best regds,
manish.
.आयुर्वेद मे यकॄत रोगों का इलाज संभव है । सबसे पहले तो आप आम पाचन के लिये सुदर्शन चुर्ण २ ग्रा. और अर्क मको २५ मि. लि. सबह खाली पेट १ सप्ताह के लिये सेवन करें।
उसके बाद पंचतिक्त घृत ५० मि. ग्रा. से शुरु करके ५० मि. ग्रा. हर रोज बडाते हुए तीन दिनो तक सुर्यदोय होने के समय सेवन करे और केवल मुंग की दाल वाली खिचडी का सेवन करे , प्यास लगने पर कोष्ण जल का सेवन करें।
हल्के जुलाब लगाने के लिये आप निशोथ ४ ग्रा. और १० ग्रा. मिश्रि मिलाकर सेवन करें , इससे आपको हल्के दस्त लगेंगे घबराना मत।
आरोग्य वर्धनी वटी ४०० मि ग्रा.
लोक नाथ रस २५० मि. ग्रा.
धात्री लौह २५० मि. ग्रा.
यह एक मात्रा है , इसको आप सुबह शाम शहद मे मिलाकर सुबह शाम खाली पेट ले।
भुमि आँवला १२ ग्रा. रात को आधे गिलास गर्म पानी मे भिगोकर सुबह खाली पेट ले
यह आप लगातार २१ दिनो तक करें।
गरिष्ठ भोजन, अधिक तैलीय पदार्थ , और मिर्च का सेवन मत करें

December 29, 2008

दमा asthama

नमस्कार
मै पिछले १५ साल से अस्थमा से परेशान हूँ। मुझे नियमित रूप से कब्ज रहता है। रोज रात को छींके आनी शुरू हो जाती हैं, जो सूबह ११ बजे तक रहती हैं। किसी तरह का व्ययाम नही कर पाती हूँ, तुरन्त ही साँस लेने मे तकलीफ शुरू हो जाती है, इस वजह से वजन भी बढ गया है। मै ३२ साल की घरेलु महिला हूँ, घर पर मेरी वजह से सभी परेशान रहते हैं। कुल मिलाकर अब यह तकलीफ बर्दाश्त के बाहर है। मार्गदर्शन करें।


दमा वाकई मे तकलीफदेह बीमारी है, पर आप चिन्ता ना करें, आपके इस तकलीफ का समाधान है।
१. सबसे पहले आप गरम पानी पीना शुरू करिये। जब भी लें, गरम पानी ही लें। (कभी कभार समान्य ताप की पानी ले सकती हैं)
२.सुबह नाश्ते मे गाजर, पपीते, को नाश्ते मे शामिल करें।
३.नाश्ते के बाद ११ दाने कालीमिर्च के दाने खा कर एक गिलास गरम पानी लें।
४.खाना आप एक साथ भर पेट न खाकर थोड़ी-थोड़ी बार बार खाईये।
५.कुछ दिनो तक गुड़, मिठाई, तली भूनी चीजो को भूल जाईये(हफ्ते मे एक बार थोड़ा सा ले सकती हैं)
६.अमरूद, केले जैसे ठण्डी तासिर के फलो का ना लें।
६.रात को सोने के २ घण्टे पहले खाना खा लें।
७.सोने के ठीक पहले एक गिलास दुध मे आधी चाय चम्मच हल्दी पाऊडर, और ११ दाने काली मिर्च डालकर एक उबाल आने दें। अब सामान्य ताप होने पर कालीमिर्च चबाचबाकर ऊपर से दूध पी जायें।
८.अस्थमा का दौरा पड़े तो अपने इन्हेलर्स का इस्तेमाल करे ही करे साथ मे एक ग्लास पानी मे १ चम्मच मेथी दाना डालकर पानी को आधा होने तक खौलाये, छान कर धीरे धीरे पीते रहें।
९.धीरे-धीरे आदत डालिये और सर्पासन, भुजंगासन, वज्रासन, फिर पाद पश्चिमोतासन, सर्वांगासन, सूर्य नमस्कार और रीढ़ की १२ विधियों वाले आसन करिये।
१०. शुरू मे सिर्फ गहरी साँस लेने का अभ्यास करे, फिर प्राणायम करें।
११. कुछ दिनो बाद धीमी गति से टहलने फिर जागिंग फिर थोड़ा तेज दौड़ लगाने का अभ्यास करें (आप याद रखिये कि यह सब एक दिन मे कतई ना करें) आराम से धीरे धीरे अभ्यास करें।
१२. power key meditation for asthma, का कोर्स कर लिजीये।
१३. अपने औरा रीडर को सम्पर्क करिये और उनसे नियमित रूप से हर १ महीने पर औरा बैलेंस करवाईये।
१४. चन्द्र पेन्डेंट को ऊर्जान्वित करके पहनिये।

एक महीने यह सारा प्रयोग करें, और फिर हमे बतायें। आप याद रखिये ईलाज जादु की छड़ी नही बल्कि आपके और चिकित्सक दोनो के धैर्य किये हूए मेहनत का परिणाम होता है।

(हम आपकी प्राईवेसी का सम्मान करते हैं, अतः आपके इच्छा के बिना आपका नाम, पता प्रकाशित नही किया जायेगा)

July 30, 2008

क्या आप अति निद्रा से परेशान हैं?

पिछली बार हमने अनिद्रा पर बात की थी, अब अनिद्रा के बाद जरूरी हो जाता है अतिनिद्रा पर बात करना, अतिनिद्रा यानि की बहूत ज्यादा नींद आना, एक वक्त था जब मै इसके गंभीर चपेट मे थी, बस बैठे-बैठे ही नींद आ जाती थी। ऐसे हालत से परेशान होकर मैने एक मन्त्र याद किया था, जिसका प्रभाव ये हूआ कि मै १५ दिन तक सो ही नही पायी, खैर अब तक वो मन्त्र मुझे याद नही है, और मै दूबारा उतने खतरनाक मन्त्र को याद भी नही करना चाहूँगी, पर कुछ उपाय जरूर हैं जिनसे मै काफ़ी देर बिना सोये काम कर सकने के लिये तैयार हो जाती हूँ।

आपका काम अगर दिन भर बैठकर करने वाला है तो फिर आप अपने साथ ठंडे पानी का गिलास रखिये, हर एक घंटे पर कुछ घूंट पानी पीते रहिये।
लगातार एक कूर्सी ना बैठकर बीच बीच मे धमा-चौकडी मचा लेनी चाहिये।
नींद भगाने के लिये यूँ तो चाय-कॉफ़ी का सहारा लिया जाता है, पर बहूत ज्यादा मात्रा मे लेना खतरनाक हो सकता है, इसकी जगह आप कोई भी जुस ले सकते हैं, जिससे आपको ताजगी मिलती रहे।
बहूत देर तक एक कमरे मे बैठे रहने के बजाय बाहर टहल कर आने से ताजगी बढ जाती है।
रात को पूरी नींद लें।
अक्सर देखा गया है कि जिनको मल्टी-विटामिन की कमी होती है, उन्हे अति-निद्रा की शिकायत होती है, इसलिये आप मल्टी-विटामिन का सेवन कर सकते हैं।
अति निद्रा किसी अन्य बीमारी के कारण भी हो सकती है, अतः उसका जाँच करा ले और इलाज करायें।

आज का मंत्र-

सुबह बिस्तर छोडने से पहले मानसिक त्राटक करें, शरीर के प्रत्येक हिस्से पर, और फिर सिकुडन और शिथलन करें दस बार। ५ मिनट के लिये शवासन कर लें। इसका नियमित अभ्यास आपको सुबह की ताजगी के साथ रात की चाँदनी तक तरोताजा रखेगा।

साथ मे आप भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास भी करिये रोज ५-१० बार और बस बेफिक्र रहिये, तरो-ताजा रहिये।

July 23, 2008

अनिद्रा का समाधान

अनिद्रा आम जनता की आम परेशानी, ना ना यह परेशानी जितनी आम जनता को है उससे ज्यादा खास लोगो को भी है, तभी तो २१ जुलाई की रात कई सांसद सो नही सके और सुबह उनकी तबीयत इतनी नासाज हूई कि चिकित्सा केन्द्र का रूख करना पडा।
काश! यह लेख मैने पहले ही डाल दिया होता, या फ़िर काश वो मुझसे इलाज कराते, बीमार होने के और भी अच्छे बहाने बना देती मै :)।
खैर रात गयी बात गयी वाली दृष्टि से मै आगे बढ रही हूँ अनिद्रा के समाधान के लिये।
वास्तव मे अनिद्रा कोई बीमारी नही है, बस वो बीमारीयों को आने का न्योता देती है, या फ़िर किन्ही अन्य बीमारीयों/परेशानियों के कारण यह बीमारी भी सर चढ के बोलती है।
इस परेशानी से परेशान लोगो की एक खास परेशानी यह बन जाती है कि जब पूरी दुनिया सो रही हो तो वो बातें किससे करें? मजाक नही सच मे, मेरे पास रोज ही इस परेशानी से पीडीत आते हैं, प्रतिशतता मे इनकी संख्या ९९% कह सकती हूँ, एक तो कारण है कि अनिद्रा के लिये सही इलाज सिर्फ़ मेडिटेशन के पास है, दुसरा कारण है कि डॉक्टर भी इतनी सारी नींद की गोलियाँ खिला चुका होता है कि अब खिलाने की हिम्मत नही रहती। बहूत हूई मस्ती अब काम की बात करती हूँ :)।

नही थोडी सी मस्ती और कर लेती हूँ फ़िर काम की बात-

आप एक बोरींग सी किताब लेकर बैठ जाईये, नींद ऐसे ही आ जायेगी। वो कैसे? वो अकबर बीरबल की कहानी है ना एक, कि बार बादशाह को अनिद्रा की बीमारी लग गयी, बडे-बडे वैद्य आये पर इलाज ना करे सकें। मंत्रीगण आते और उनको अच्छी-अच्छी कहानियाँ सुनाते, पर सब बेअसर, बीरबल आये और एक कहानी सुनाने बैठे, एक घने जंगल मे एक बहूत ही घने पेड पर, बहूत सारी चिडीयाँ बैठी थीं, एक शिकारी वहा गया और उसने जाल बनाया उसमे पहले एक फ़ँसी, फ़िर दुसरी, फ़िर तीसरी..... बादशाह बोले आगे क्या हूआ? बीरबल ने कहा हूजूर पहले सारी फ़ँस जाये तभी तो शिकारी आगे जायेगा, और जब तक शिकारी आगे नही जायेगा, कहानी आगे कैसे बढेगी? बीरबल एक पर एक चिडीया फँसाते रहे और बादशाह को आखिर कार नींद आ गयी। वैसे ये नुस्खा बाद मे भी कई दादी-नानी भी आजमाती आ रही हैं।

कोई सास-बहू सीरीयल भी नींद लाने के लिये मजेदार ऊपाय है।

मुझे जब नीद नही आती तो मै माताश्री का चरणचाप करती हूँ, कुछ समय मे आ ही जाती है, मुझे भी उन्हे भी। :)

अब कुछ अच्छे नुस्खे, मतलब इलाज वाले-

सबसे पहले आप ये तय करें कि आपको अनिद्रा से पीडीत क्यों है? अगर किसी बीमारी की वजह से हैं तो फ़िर आपको पहले उसका ईलाज कराना होगा। ऑफकोर्स आप उसके लिये मुझसे पूछ सकते हैं :)।

आप तय करें कि आपको रात मे किस वक्त से किस वक्त तक नींद नही आती। क्योंकि मेडिटेशन पैकेस उसके अनूरूप बनाना पडता है।

अगर आप मधुमेह और मोटापे के शिकार नही हैं तो सोने से थोडा पहले मीठा खाईये, नींद आ जाती है।
सोने के पहले एक गिलास दूध भी नींद लाने मे सहायक है।

अगर आप बैठे रहते हैं, या कूर्सी पर बैठकर काम करते हैं तो कुछ व्यायाम की आदत डालिये। इतना ही जितने से आप आलस महसूस करें, ना कि आप थक के चूर हो जाये, इस परिस्थती मे भी नींद आपसे कोसो दूर भागा जायेगा।

सोने के समय से आधे घंटे पहले मोबाईल ऑफ कर दें, इससे निकलने वाली तरंगे आपकी नींद चूरा सकती हैं।


मेडिटेशन- यह मेडिटेशन पहले चरण का है... इसके बाद नियम २ लागू होता है जिसके लिये आपको मुझसे सम्पर्क करना पडेगा।

आराम से लेट जायें, बत्तियाँ गुल होनी चाहियें, १० बार गहरी साँस लें, ५ बार ह्ल्के ऊँ का उच्चारण करिये, दोनो हथेलियो को आपस मे रगड कर, उसकी गरमी से आँखो को ढक लिजिये।
अब शवासन की तरह.. धीरे धीरे करके अपने शरीर को शिथिल करना है, फ़र्क इतना है कि शवासन मे पैर से सर तक चलते हैं, इसमे सर से पैर तक... थोडे दिन अभ्यास किजिये... आप गहरी नींद के मालिक बन जायेंगे, बस सुबह बिस्तर छोडने के पहले शवासन कर लें।

और चलते चलते रंजना जी के तरफ़ से सुझाव-

नींद के लिए प्राकतिक उपचार ..नींद न आने पर भीगी घास पर सुबह टहलना चाहिए

सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाना भी अच्छा है ।



नीम्बू -पानी और शहद एक गिलास पानी में पीने से भी नींद आती है ।
पेट साफ़ रहे इस बात का ध्यान रखे क्यूंकि नींद न आने की शिकायत करने वाले रोगी कमजोर पाचन तंत्र के भी शिकार होते हैं

तो बस अब जमके सोने के लिये तैयार हो जाईये :)

July 20, 2008

कोलाइटिस का इलाज

कोलाईटिस, हालाँकि इसके लिये कोई खास मौसम जिम्मेदार नही होता है, परन्तु बरसात के मौसम मे जीवाणु, विषाणु से संक्रमण का खतरा बढ जाता है, इसलिये इस मौसम मे इस बीमारी से आमना-सामना हो जाता है, यही नही यह बीमारी आनुवांशिक तौर पर भी पीढी तर पीढी चलती जाती है, यह बीमारी कुछ दिनो मे भी ठीक हो सकती है और सालो भी लग जाते हैं, इसलिये जरूरी था कि इस बीमारी के इलाज पर चर्चा हो, इसके लिये विशेष धन्यवाद हमारे एक ब्लॉगर मित्र का भी है, जिन्होने मुझे इस पर लिखने को कहा।

मेरे पास कई कोलाइटिस के कई ऐसे मरीज आते हैं, जो इस तकलीफ़देह बीमारी को सालो से झेल रहे होते है, कितने ही इलाज कराने के बावजुद आराम नही मिलता है। कोलाइटिस का वैसे तो मानसिक भावना से कोई लेना-देना नही है फ़िर भी बहुत दिनो तक इस बीमारी से घिरे रहने के बाद लोग अवसाद ग्रस्त हो ही जाते हैं जो उनके ठीक होने मे बाधक बन सकता है।

काफ़ी मेहनत (मेरे और उन मरीजो/दोस्तो) के बाद हम इसके सफ़ल इलाज के तरफ़ बढे थे, मै उन दोस्तो का जरूर धन्यवाद देना चाहुँगी जिन्होने मुझपर यकिन किया, और ये जानने के बाद भी कि वो मेरे लिये कोलाइटिस के उन मरीजो मे से एक हैं, जिन पर मै प्रयोग कर रही हुँ, मेरे पास कोई प्रामाणिक इलाज नही है, मेरा साथ दिया, और इस बीमारी के समाधान को तलाशने मे मेरी हर संभव कोशिश की।

अब समाधान की तरफ़ आगे बढते हैं-


  1. सबसे पहले अपने खान पान का विशेष ध्यान रखना शुरू करिये, आप एक सुची भी बना सकते हैं कि आज आपने खाया, खाने के बाद तकलीफ़ बढी या कम हुई। ये सुची आपको अपने लिये सही भोजन चुनाव करने मे मदद करेगी।

  2. आपको इस रोग के दौरान मेडिटेशन की सख्त जरूरत है, किसी भी तकनीक वो मेडिटेशन करिये जो विषाणु संक्रमण पर कारगर हो, विशेषतः मैने देखा है कि, कलर प्रोजेक्शन तकनीक इस पर काम करती है।

  3. औरा हीलींग भी दैनिक करानी पडेगी, इसलिये आप किसी औरा हीलर मित्र को पकडिये, जो कम से कम शुल्क ले, क्योकि हीलींग सेसन काफी लम्बा हो सकता है।

  4. अपने साथ सात रंग के क्रिस्टल जरूर रखें (ऊर्जान्वित क्रिस्टल)।

  5. सफ़ेद पिरामीड मे रखे गये पानी का सेवन करें।

  6. हरे और सफ़ेद रंग के बोटल मे सुर्य चिकित्सा द्वारा तैयार पानी का सेवन करें।

इन सब तरीको को अपनायें, धीरे-धीरे आराम होने लगेगा, उसके बाद



  • वज्रासन शुरू करें।

  • कुछ दिनो बाद जालन्धर बन्ध के साथ प्राणायम शुरू करें।

  • स्वर साधना करें।

कुछ ही दिनो मे आप कोलाइटिस से छुटकारा पा लेंगे।


और कुछ पुछना हो तो आप बेफ़िक्र मुझे सम्पर्क कर सकते हैं।


और हाँ अगर आपको किसी विशेष रोग के समाधान की जरूरत है तो powerkeymeditation at gmail dot com पर लिखे भेजे या फ़िर यही कमेन्ट बाक्स मे बता दिजिये। हम यथा सम्भव सटीक समाधान लाने की पूरी कोशिश करेंगे।

July 15, 2008

कब्ज

पिछले पोस्ट मधुमेह पर d gupta और दिनेश जी ने कब्ज का निवारण बताने के लिये कहा था तो इनके इच्छा के अनुरूप आज मै कब्ज के निवारण के लिये ही पोस्ट लिख रही हुँ।

अगर आपको कभी-कभी महीने दो महीने मे कब्ज की शिकायत होती है तो कोई बडी बात नही है, यह समान्य सी घटना है, पर वही पर अगर कब्ज नियमित रूप से रहता है तो सचेत हो जाईये क्योंकि कब्ज अपने आपमे भले ही कोई खतरनाम बीमारी न हो पर कालांतर मे इससे कई बीमारीयाँ जन्म लेने लगती हैं। जैसे कि चर्म रोग, आँत रोग, दमा, चिडचिडापन इत्यादि।

कब्ज से निपटने के लिये सबसे पहले जरूरी होता है, अपने खानपान और सोने जागने की आदत का निरीक्षण किया जाये और सुधारा जाये।
  1. आप रात को ताँबे के लोटे मे पानी रखिये सुबह उठते ही आप उस पानी का सेवन कर करें, फ़िर थोडा उछल-कुद करिये, फ़िर वज्रासन मे १० मिनट के लिये करिये।
  2. सुबह नास्ते मे छाँछ का सेवन करें।
  3. छाँछ पीने के एक घंटे बाद ही अन्य कुछ खाईये तो अच्छा फ़ायदा होगा।
  4. खाने से गरिष्ट तली चीजो को कुछ दिनो के लिये दुर कर लें।
  5. सफ़ेद पिरामीड मे ४ घंटे के लिये पानी रखिये और उसका सेवन करिये।
  6. रात को खाने के बाद सोने के पहले खीरे का सुप का सेवन करिये।

कुछ दिनो तक इस प्रयोग को नियमित करने से कब्ज धीरे धीरे ठीक हो जाता है, अगर इससे १००% सफ़लता न मिले , उपरोक्त विधी के साथ इन्हे भी शुरू करें।

  • आप धनुरासन और भुजंगासन करना शुरू किजिये।
  • आप औरा हीलींग कराईये।
  • क्रिमसन जिरकॉन को ऊर्जान्वित कराके अपने साथ रखिये।
  • नीले रंग के काँच के बोटल मे पानी रखिये १२ घंटे तक रखकर सेवन किजिये।

अब निस्संदेह आप कब्जमुक्त हो जायेंगे, फ़िर भी कम ना बने तो हमे सम्पर्क किजिये। :)

July 14, 2008

मधुमेह

मधुमेह भी उच्च रक्तचाप की तरह हर घर मे जम रहा है, मुझे याद है कि दीघा बीच से लौटते हुए हम एक जगह पर चाय पीने रूके, हमे देखते हुए उसने पुछा सर चाय मे चीनी डालनी है या नही?
मै हतप्रभ थी कि भला ऐसा क्यों पुछा, इसलिये मैने उससे जवाब भी माँगा, बैरे ने बडे आराम से जवाब देते हुए कहा कि मैम, यहाँ आने वाले यात्री अक्सर सम्पन्न परिवार के ही आते हैं, और समपन्नता कि निशानी मधुमेह है... इसलिये ऐसा हम पुछ लेते हैं :।
मेरा दुसरा सवाल था कि सुबह से यहाँ कितने लोग आये और कितनो ने बिना चीनी की चाय पी?
जवाब आप सुनना भी नही चायेंगे..... ९९% प्रतिशत लोग फ़ीकी चाय लेते हैं। मतलब कि उस होटल से गुजरने वाले ९९% लोग मधुमेह के शिकार होंगे... :। ।
आँकडा मेरे लिये चौकाने वाला था, रास्ते मे ही फ़ैसला लिया गया कि मेरा अगला काम मधुमेह पर ही होगा, यह वाक्या करीब ४ साल पहले के है... कोलकता वापस आकर, अपने ग्रुप के डॉक्टर्स से मिली, सबने कहा कि एक बार मधुमेह जिसे हो जाये, वो जाता नही है... हँसते हुए मैने कहा कि ये तो मुझे भी पता है, अगर यही जवाब सुनना होता तो मै आपसे मिलती ही क्यों?
खैर फ़िर हमने थोडी से मेहनत की, नतीजा निकला कि ठीक होने का वक्त आपको कितना मधुमेह है और कितने सालो से है यह तय करेगा, पर यह बीमारी अब ला-इलाज नही रहेगी।

इस पोस्ट को मै २ भागो मे लिखुँगी, अभी बता रही हुँ इलाज, अगले पोस्ट मे बताऊँगी हम मधुमेह के गिरफ़्त मे ना आयें उसका तरीका ।
  1. मधुमेह होने पर सबसे पहला काम वही होगा, चिर परिचित, यानि की शुरू मे अपने डॉक्टर्स की सारी बाते मानी जाये। यानि की नियमित दवा लें, मीठे वगैरह से परहेज करें। वगैरह वगैरह
  2. सुबह उठकर जॉगिंग शुरू करें।
  3. सुबह शाम प्रेतासन करें १०-१० मिनट के लिये।
  4. अल्फ़ा हीलींग लेना शुरू किजिये।
  5. औरा हीलींग भी कराईये।
  6. आपके औरा के हिसाब से कृस्टल हीलींग भी कराईये।
  7. नीले रंग की बोटल मे पानी रखिये और १२ घंटे तक उसे धुप मे रहने दिजिये, तापमान सामान्य होने पर उसका सेवन करिये।
  8. जहाँ तक हो सके नीले रंग के हल्के वस्त्र पहनकर सुबह मे सुर्यस्नान की आदत डालिये।
  9. मधुमेह चेक-अप नियमित कराते रहिये ताकि आपको समझ मे आता जायेगा कि कितना लाभ हुआ।
  10. सेल्फ़ मेडिटेशन शुरू किजिये।
  11. बहुत जरूरत होने पर समय समय पर यौगिक उपवास भी किजिये। ध्यान रहे कि यौगिक उपवास कि विधी आप खुद से ना बनाकर, चिकित्सक से परामर्श करके ही बनाईये, खुद से चार्ट बनाना हानिकारक भी हो सकता है।

कुछ ही समय मे आप पायेंगे कि आप रोगुन्मुलन कि दिशा मे बढ चुके हैं, फ़िर आपको फ़ीके खानो की जरूरत नही पडेगी।

नोट- यहँ कोई चमत्कार नही होने वाला है, ऐसा नही कि आप २-४ दिनो मे ठीक हो जायेंगे, आपकी स्थिती, आपके और आपके हीलर के धैर्य और मेहनत के फ़लस्वरूप सफ़लत मिलती जायेगी।

July 08, 2008

उच्च रक्तचाप

आज उच्च रक्तचाप आम जन की आम समस्या बन चुकी है, लगभग प्रत्येक घर मे उच्च रक्तचाप से पीडीत जन मिल ही जाते हैं, कई लोगो का यह मानना भी है कि, उच्च रक्तचाप धनवान होने की निशानी है। मुझे हर महीने ऐसे लोग मिल जाते है जो बडे खुश होकर बताते हैं कि उन्हे उच्च रक्तचाप है, जैसे कि यह उनके प्रतिष्ठा का सवाल हो, अब क्या कहें उन लोगो के बारे मे।

खैर मै बात कर रही हुँ उन लोगो के लिये जिन्हे वाकई मे उच्च रक्तचाप एक समस्या लगती है, और वो उससे निजात पाना चाहते हैं।
  1. डॉकटर्स एक तो सीधा सा उपाय बता ही देते हैं, नमक मिर्च मसाले बन्द कारण कि उच्च रक्तचाप होने के मुख्य कारणो इनका नाम अग्रणी होते हैं।
  2. रोज-रोज दवाई खाते रहो।
  3. थोडी बहुत व्यायाम भी करो।

ये तीन नियम डॉकटर्स सुना देते हैं, आगे योग गुरू आपको योग सिखाते हैं, वो भी पुरे २- २ घंटे का, अब आज की दौडती भागती जिन्दगी मे रुखा-सुखा खाना और दवाईयो के साईड-ईफ़ेक्ट झेलना, साथ मे व्यायाम भी करना, ले देकर हम इंसान कम बीमार मशीन लगने लगते हैं।

अब आप कहेंगे कि फ़िर क्या करें.....? मै बताती हुँ ना :)

पहले तो आप रेगुलर चेक कराईये कि आपका रक्तचाप कब ज्यादा रहता है, महीने मे कितने दिन, सामान्य रहता है, रक्तचाप सिर्फ़ किन्ही खास मौसम, वक्त मे बढता है।

मै यहाँ मानकर चल रही हुँ कि आप उच्च रक्तचाप के गम्भीर मरीज हैं, उसी हिसाब से समाधान दे रही हुँ, विस्तृत रुप से जानने के लिये आप मुझे सम्पर्क कर सकते हैं।

  1. शुरू मे दवाओ को नियमित रूप से लेते रहें।
  2. योगासन शुरू करें, पर दो घंटे करने की जरूरत नही है, दिन के सिर्फ़ २० मिनट, ( या फ़िर आप पहले से योगासन, व्यायाम करते आ रहे हैं तो ठीक है)
  3. अगर आप योगासन के आदी नही हैं तो आप १२ चरण का सुर्यासन किजिये।
  4. साथ मे प्राणायाम शुरू किजिये, सबसे पहले सिर्फ़ कुम्भक प्राणायम कुछ दिन अभ्यास के बाद, अनुलोम-विलोम का पहला चरण, कुछ दिनो बाद, भ्रामरी, फ़िर अनुलोम विलोम का दुसरा चरण, फ़िर तीसरा चरण, फ़िर भ्रस्तिका, उसके फ़िर से अनुलोम विलोम का चौथा चरण।
  5. याद रखिये कि सारे एक दिन नही करना है बल्कि इसी क्रम मे थोडे थोडे दिनो के अन्तराल पर करना है।
  6. कुछ दिनो के लिये आपका भोजन भी रूखा-सुखा ही रहेगा, मतलब की जैसा डॉक्टर ने बताया है।
  7. ऊर्जान्वित सफ़ेद पिरामीड मे एक कटोरी पानी रखिये, उसे १२ घंटे रहने दिजिये, फ़िर उसके बाद पी जाईये।
  8. सफ़ेद काँच के बोटल मे ४ घंटे के लिये पानी रखिये और उसको पीते रहिये।
  9. ॐ शान्ति मन्त्र का जाप करें ( अगर कोई धार्मिक पाबन्दी ना हो तो) । ॐ शान्ति मन्त्र का प्रभाव मैने प्रत्येक मरीजो पर देखा है, पर कोई पाबन्दी नही है कि आप करो ही, करो तो अच्छा होगा।
  10. रक्तचाप को सामान्य कराने वाला मेडिटेशन करिये। कौन सिखायेगा? मै हुँ ना :) या फ़िर आप अपने आसपास मेडिटेशन सेंटर पर जाईये, थोडी जेब ढीली करिये और सीखीये।
  11. इस सबके बाद जरूरत हो तो औरा हीलींग भी कराईये।
  12. मौसमी फ़लो के रस का सेवन करें ( घर के बनाये हुए)
  13. एक कप लौकी का जुस, एक चम्मच अदरक का रस, १० तुलसी के पत्ते, और १० पुदीना के पत्ते इनका जुस बनाये और पी जाईये, तुरन्त ( खुद भी लिजिये और घर मे बाकी लोगो को भी ताकि उन्हे कभी उच्च रक्तचाप से सामना करना ही नही पडे।

मर्ज के अनुरूप २ हफ़्ते से ही असर होने लगता है, और आपको धीरे धीरे दवाई की मात्रा कम करने की परमिशन आपका शरीर देने लगेगा।

आगे चलकर दवा बन्द हो जायेगा, रुखी सुखी की जगह अब अच्छा खान शुरू करें, हाँ तैलीय भोजन तो अब भी बन्द(कम) ही रहेगा तब भी बहुत सी चीजे खाने का परमिशन मिल जाता है।

हाँ आप कहेंगे कि अब क्या विधी २-११ बन्द कर दिजिये... तो मुझे कहना पडेगा नहीं, व्यायाम बन्द नही होगा, पिरामीड के पानी का प्रयोग अब रोज ना होकर हफ़्ते/महीने मे एक बार होगा। सुर्य चिकित्सा का जल चलता रह सकता है आगे २ साल बाद के लगभग अब इसकी जरूरत नही रहेगी।

मेडिटेशन चलता रहेगा... और.... और तो कुछ नही था... १२,१३ तो भोजन सामग्री हैं :)

बस उच्च रक्तचाप रहित खुशहाल जीवन जीने के लिये तैयार हो जाईये।

July 05, 2008

खुजली और समाधान

इस मौसम मे बच्चो को (बडो को भी) खुजली की समस्या होती है, पुरे शरीर मे या फ़िर किसी विशेष भाग पर पहले हल्की सी खुजली होती है, वहाँ हाथ जाने के बाद, दाने निकलने शुरू हो जाते हैं, धीरे-धीरे यह खुजली फ़ैलती जाती, और वॄहद रूप धारण कर लेती है, समस्या बढ गयी तो अन्य परेशानियाँ भी शुरू हो जाती है।



नुकसान-



  1. खुजली अपने आपमे कोई गम्भीर बीमारी नही है। पर दुसरे बीमारीयों का संकेत बन सकती है।

  2. अगर खुजली का कारक रक्त अशुद्धि हो तो तो कालांतर मे अन्य समस्याये पैदा होती हैं।

  3. खुजली का कारक किसी तरह की एलर्जी हो तो आपको हमेशा उन चीजो के सम्पर्क से बचना पडेगा जिससे एलर्जी है।

  4. खुजली का कारक सिर्फ़ मौसम का बदलाव हो तो भी, एक ही स्थान पर खुजाने और बार-बार दाने निकलने के कारण वहाँ की त्वचा अत्यंत नाजुक और संवेदनशीन हो जाती है, जिससे कई तरह की समस्याओं से आमना-सामना होता है।

  5. मैने अक्सर देखा है कि जिन लोगो को इस तरह के त्वचा रोग होते हैं, उन्हे अस्थमा से भी आमना-सामना करना पडता है।

सावधानी-



  1. खुजली होने पर प्राथमिक सावधानी के तौर पर सफ़ाई का पुरा ध्यान रखना चाहिये।

  2. खुजली का जब भी दौरा पडे, आप साफ़ मुलायम कपडे से उस स्थान को सहला दिजिये।

  3. प्रवॄति के अनुसार ठंडे या गरम पानी से उस स्थान को धो लिजिये ( किसी को ठंडे पानी से तो किसी को गरम पानी से आराम होता है, उसके मुताबिक अपने लिये पानी का चयन कर लें)।

  4. साबुन जितना कम कर सकते हैं कम कर लेना चाहिये, और सिर्फ़ मॄदु साबुन का ही उपयोग करें।

  5. कब्ज हो तो उसका इलाज करें।

उपचार-



  1. ३-३ घंटे धुप मे अलग अलग हरे और पीले रंग के काँच के बोटल मे पानी रखें और उस पानी से त्वचा की सफ़ाई सुबह शाम करें( उपरोक्त रंग के बोटल ना मिलने पर, बोटल पर उस रंग का कागज चिपका सकते हैं)।( सामान्य तापमान पर आने के बाद)

  2. सफ़ेद बोटल मे पानी भरकर ६ घंटे के लिये रखिये, और थोडा-थोडा करके पीते रहें। ( सामान्य तापमान पर आने के बाद)

  3. हफ़्ते मे दो बार मुल्तानी मिट्टी और नीम की पत्ती का लेप लगायें आधा घंटे के बाद साफ़ पानी से धो लें।

  4. बैंगनी औरा ऊर्जान्वन कराईये।
  5. इस खुजलाहट भरी परेशानी से दुर रहिये।

हाँ इस सबके बाद भी अगर खुजली जारी है तो मै हुँ ना, आपकी ऑनलाईन डॉक्टर मुझसे निःसंकोच सम्पर्क कर सकते हैं।

August 20, 2007

जान है तो जहान है, हृदय है तो जान है।

आजकल हृदयाघात की समस्या बढ़ती जा रही है। अब हर तीसरे इंसान को यह डर लगा रहता है... मै हृदय रोगी तो नही"।

ऐसे मे जरूरत है थोड़ी जागरूकता की, अपने सामान्य जीवन मे थोड़े से फेर बदल की, जिससे आप इस थकाऊ, खर्चीले बीमारी से दूर रहेंगे।


1. अपने खान-पान पर ध्यान दीजिये, जरूरत के अनुसार खाईये। जहाँ तक हो सके तैलीय पदार्थो से दूर ही रहिये।
सामान्य तौर पर महिलाओ की एक आदत होती है, खुद भले ही रूखी-सुखी खा लेती है, पर घर के और लोगों को घी मे चुपड़ी रोटी खिलाती हैं, इस तरह कि आदत से बचना ही श्रेयष्कर होगा। इसलिये अपने घर की महिलाओ को यह बात समझानी चाहिये कि "जिससे हो दुश्मनी निभानी, उसे है घी रो-टी खिलानी, अपनो को दिल से अपनाईये, भले ही रूखी-सूखी खिलाईये।"

मुझे अक्सर बुजुर्ग लोग यह कहते हुए मिलते हैं कि आजकल के बच्चो मे तो अब वो बात नही रही, पहले हम इतना घी खाया करते थे और पचा जाते थे, बहूत ताकतवर होते थे... इत्यादि।
ऐसे भ्रम से दूर ही रहना चाहिये, तब एक घर मे 7 भाई होते थे और उनमे अधिकांश उम्र के पहले ही गुज़र जाते थे, दूसरी बात की तब के परिवेश मे और आज के परिवेश मे बहूत ज्यादा अंतर हो गया है।
तब शारीरिक मेहनत ज्यादा होती थी और अब मानसिक मेहनत का जमाना है। अब कुदाल चलाना नही रहा, बल्कि मशीनीकरण हो रहा है हर तरफ।

2. खुद को फ़ालतू की परेशानियों मे नही डालना चाहिये, एक कहावत है "जब पैसे ना थे तो कमाने की परेशानी, हो गये तो बचाने की परेशानी"। भगवान ऐसी आदत से बचाये। आप समझ रहे होंगे, मै क्या कहना चाहती हूँ :)।

3. आज की सबसे बड़ी परेशानी "लोग क्या कहेंगे"। इस तरह के चक्कर मे पड़ कर किसी भी हानिकारक व्यवस्था को ना ही अपनायें, कहने का मतलब है कि, सिर्फ दिखावे के लिये किसी भी नशे का आदी नही बनना चाहिये। मै ऐसा इसलिये कह रही हूँ क्युँकि कई लोग यह कहते मिलते हैं "क्या करूँ मेरी ऐसी आदत ना थी, पर दोस्तो के लिये...., या फिर अपने आपको को उच्च प्रोफाईल मे लाने के लिये ऐसी आदत डाल ली... इत्यादि, ऐसी आदत से तौबा ही रखना चाहिये, ऐसी कोई भी ऐसी आदत नही डाले जो स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हो।

4. 30 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से अर्जुन क्वाथ का सेवन करें, याद रहे यह कोई दवा नही बल्कि हृदय के लिये अमृत है, इसलिये निःसंकोच इसका सेवन करें।

5. 35 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से वार्षिक T.M.T टेस्ट कराना चाहिये।

T.M.T टेस्ट ना कराने की वजह होती है, इसे लोग फालतु का खर्च मान बैठते हैं, जो कि गलत है, यह फालतु खर्च नहीं बल्कि बीमारी होने के बाद, होने वाले खर्च और परेशानी से बचने का तरीका है।
दुसरा तथ्य है कि कितने लोग बीमारी पकड़े जाने के डर से टेस्ट नही कराते, यह भी गलत है, कोई बिमारी आपको अन्दर ही अन्दर खोखला करे उससे अच्छा है कि पहले ही उसका पता लग जाये, ताकि समय रहते समाधान किया जा सके।

6. हास्य चिकित्सा को अपने जीवन मे स्थान दिजिये, मतलब की हँसिये, और दुसरो को भी हँसाईये।

7. ढ़ृढ़ इच्छाशक्ति रखिये, गलतियों से सीख लिजिये, कुंठा का शिकार मत बनिये।

8. सेल्फ मेडिटेशन फॉर हॉर्ट जरूर सीखिये.... (कौन बतायेगा? मै हूँ ना :D)
ना सीखने वाले के पास भी अपने तर्क हैं... फालतु का खर्चा कौन करें... जनाब यह खर्च नही स्वस्थ्य रहने का उपाय है।
अब मेडिटेशन के लिये वक्त नही बचता... अर्रे आज वक्त नही है... (कल को बिमारी पकड़ ली तो वक्त ही वक्त रहेगा... आपकी मर्जी... मेरा काम तो मात्रा बताने/सीखाने भर का है।) अब कुछ नही कहूँगी वरना लगेगा मै प्रोमोशन करने मे लगी हूँ :)।


यह तो रहा हृदय को बीमारींयों से बचाने का तरीका, वो क्या करें जिन्हे यह बीमारी लग गयी है... अगले अंक मे उस उपाय के साथ आऊँगी... तब तक लिये टाटा ।